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साधना स्वायत्त सहकारिता – ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता की मिसाल

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Jul 4, 2025

पौड़ी-  उत्तराखण्ड राज्य का पर्वतीय जनपद पौड़ी गढ़वाल इन दिनों एक अनोखी सामाजिक एवं आर्थिक क्रांति का साक्षी बन रहा है। इस बदलाव के केंद्र में है — “साधना स्वायत्त सहकारिता”, जिसने ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाते हुए आत्मनिर्भरता की एक नयी मिसाल पेश की है।

यह प्रेरणादायक यात्रा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं सहयोगी संस्था हिमोथान सोसाइटी, टाटा ट्रस्ट्स के संयुक्त प्रयासों से वर्ष 2021 में शुरू हुई, जब विकासखंड पौड़ी में 6 क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) का गठन किया गया। इन्हीं में से एक है “साधना स्वायत्त सहकारिता”, जिसने आजीविका संवर्धन को अपनी प्राथमिकता बनाते हुए महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है।

15 अगस्त 2021 को मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा सहकारिता की डेयरी यूनिट का उद्घाटन किया गया। प्रारंभ में 2 ग्राम पंचायतों से जुड़ी महिलाओं ने इस पहल में भागीदारी की, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए 5 ग्राम पंचायतों तक विस्तृत हो गयी। आज इस सहकारिता के माध्यम से 206 ग्रामीण महिलाएं प्रतिदिन संगठित रूप से दूध संग्रहण कर डेयरी यूनिट में पहुंचा रही हैं। पशुपालन और दूध विक्रय से जुड़कर ये महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं, बल्कि समाज में उनका सम्मान भी बढ़ा है।

इसी कड़ी में, 15 सितम्बर 2023 को माननीय सांसद  तीरथ सिंह रावत के कर कमलों द्वारा “दीदी कैफे यूनिट” का उद्घाटन किया गया। इस कैफे में समूह की महिलाएं पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को तैयार कर स्थानीय लोगों और पर्यटकों को परोसती हैं। यह न केवल क्षेत्रीय संस्कृति और खानपान को बढ़ावा देता है, बल्कि इससे महिला समूह को एक नया स्वरोजगार का माध्यम भी प्राप्त हुआ है।

इन व्यावसायिक गतिविधियों का प्रत्यक्ष परिणाम भी अत्यंत सकारात्मक रहा है। वर्ष 2021 से अब तक, डेयरी उद्योग से साधना स्वायत्त सहकारिता को लगभग 81 लाख रुपये की कुल आय प्राप्त हुई है, जिसमें 4.60 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित हुआ है। वहीं कैफे यूनिट के संचालन से वर्ष 2023 से अब तक 9 लाख रुपये की आय तथा 3.20 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। यह आँकड़े सहकारिता की आर्थिक सफलता और महिला सहभागिता के जीवंत प्रमाण हैं।

इन उल्लेखनीय उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार द्वारा साधना स्वायत्त सहकारिता को “आत्मनिर्भर संगठन पुरस्कार – 2024” से सम्मानित किया जा रहा है। यही नहीं, 15 अगस्त 2025 को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भी इस संगठन को लाल किले पर आयोजित एक एक कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान केवल एक संस्था का नहीं, बल्कि पूरे पौड़ी विकासखंड, जनपद और उत्तराखण्ड राज्य का गौरव है।

साधना स्वायत्त सहकारिता ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, सही दिशा में मार्गदर्शन मिले और सहयोगी संस्थाएं साथ हों, तो ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन की धुरी बन सकती हैं। इस पहल से न केवल आजीविका के साधन बढ़े हैं, बल्कि महिलाओं को नेतृत्व, आत्मबल और सामूहिकता की भावना भी प्राप्त हुई है।

अध्यक्ष साधना स्वायत्त सहकारिता मंजू देवी ने सरकार, विभाग और सहयोगी संस्थाओं को उनके सतत सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है और यह विश्वास जताया है कि भविष्य में यह संगठन और भी ऊंचाइयों को छुएगा। आज साधना स्वायत्त सहकारिता, ग्राम्य विकास की एक रोल मॉडल कहानी बन चुकी है — जो यह बताती है कि एक संगठित प्रयास कैसे ग्रामीण भारत को सशक्त भारत में बदल सकता है।

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