• Sat. Sep 5th, 2026

Exactkhabar

24x7 News

देश में बढ़ रहा स्वाइन फ्लू का खतरा, बुखार नहीं तो भी इन संकेतों पर रहें अलर्ट

Byadmin

Sep 5, 2026

देश के कई हिस्सों में इन दिनों इन्फ्लुएंजा-ए के H1N1 वायरस को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। दिल्ली-एनसीआर के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं। अगस्त के अंत तक दिल्ली में संक्रमितों का आंकड़ा 3200 के पार पहुंच गया था, जबकि उत्तर प्रदेश में 2 सितंबर तक H1N1 के 685 मामलों की प्रयोगशाला जांच में पुष्टि हो चुकी थी। कुछ राज्यों में संक्रमण से मौत के मामले भी सामने आए हैं।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मरीजों में संक्रमण के लक्षण हल्के होते हैं और घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, डायबिटीज के मरीजों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू ज्यादा परेशानी पैदा कर सकता है।

सिर्फ तेज बुखार को न मानें फ्लू का संकेत

स्वाइन फ्लू का नाम आते ही आमतौर पर तेज बुखार, खांसी और बदन दर्द जैसे लक्षण ध्यान में आते हैं। लेकिन H1N1 संक्रमण की पहचान केवल बुखार के आधार पर नहीं की जा सकती। कई मामलों में व्यक्ति को बुखार नहीं होता, फिर भी वह इन्फ्लुएंजा से संक्रमित हो सकता है।

अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार कुछ लोगों में फ्लू से जुड़े सांस संबंधी लक्षण बुखार के बिना भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में लगातार खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द और असामान्य थकान जैसे संकेतों को सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर टालना ठीक नहीं है।

हर मरीज में एक जैसे लक्षण नहीं होते

H1N1 संक्रमण के लक्षण व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। बुजुर्गों में फ्लू होने के बावजूद बुखार न आना संभव है। ऐसे मरीजों में भूख कम लगना, कमजोरी या अन्य सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

वहीं बच्चों में सांस से जुड़े लक्षणों के साथ उल्टी और दस्त जैसी परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं। इसलिए केवल किसी एक लक्षण की मौजूदगी या अनुपस्थिति से H1N1 संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती।

लक्षण दिखने पर खुद से न करें बीमारी का अनुमान

फैमिली फिजिशियन डॉ. अरविंद डबास के मुताबिक खांसी, गले में खराश, नाक बंद होना और थकान जैसे लक्षण केवल फ्लू में ही नहीं, बल्कि कई दूसरे सांस संबंधी संक्रमणों में भी हो सकते हैं। ऐसे में सिर्फ लक्षणों के आधार पर यह तय करना मुश्किल है कि मरीज H1N1 से संक्रमित है या नहीं।

जरूरत पड़ने पर डॉक्टर फ्लू की पुष्टि के लिए जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इसके लिए रैपिड फ्लू टेस्ट के अलावा मॉलिक्यूलर टेस्ट भी उपलब्ध हैं। मॉलिक्यूलर टेस्ट वायरस के आनुवंशिक पदार्थ यानी वायरल RNA की पहचान करता है और आमतौर पर रैपिड एंटीजन टेस्ट की तुलना में ज्यादा संवेदनशील माना जाता है।

हालांकि प्रत्येक मरीज के लिए जांच जरूरी नहीं होती। डॉक्टर मरीज के लक्षण, संक्रमण के संपर्क में आने की संभावना और उसकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए जांच की जरूरत तय करते हैं।

सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत लें डॉक्टर की सलाह

विशेषज्ञों के मुताबिक बुखार न होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को फ्लू नहीं हो सकता। खासतौर पर बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में बिना बुखार के भी इन्फ्लुएंजा संक्रमण हो सकता है। कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर रूप भी ले सकता है।

यदि फ्लू जैसे लक्षण तेजी से बढ़ रहे हों, सांस लेने में परेशानी हो, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या हालत बिगड़ती नजर आए तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कुछ मरीजों में डॉक्टर की सलाह पर एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

संक्रमण फैलने के खतरे को भी समझें

H1N1 को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि संक्रमित व्यक्ति को बीमारी का स्पष्ट पता चलने से पहले भी वायरस दूसरों तक पहुंच सकता है। संक्रमण के शुरुआती दिनों में इसके फैलने की संभावना अधिक रहती है।

इसलिए फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर केवल बुखार का इंतजार करना सही रणनीति नहीं है। खांसी, गले में खराश, नाक संबंधी परेशानी और असामान्य थकान जैसे संकेतों पर भी ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

नोट: यह लेख उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की राय के आधार पर तैयार किया गया है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न माना जाए।

(साभार)

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *