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युवाओं में क्यों बढ़ रहा लिवर रोगों का खतरा, आइये जानते हैं इसके कारण

Byadmin

Sep 29, 2025

हम अक्सर अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और अनजाने में ही अपने शरीर के सबसे अहम अंग – लिवर – के दुश्मन बन बैठते हैं। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और नशे की लत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब न सिर्फ बुजुर्ग बल्कि युवा भी तेजी से क्रॉनिक बीमारियों और लिवर रोगों का शिकार हो रहे हैं। अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दशकों में यह समस्या देश की बड़ी आबादी को प्रभावित कर सकती है, जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट बताती है कि हर साल करीब 20 लाख लोग लिवर से जुड़ी बीमारियों के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। हृदय रोग और कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच अब लिवर रोगों की महामारी की चेतावनी और चिंता बढ़ा रही है।

भारत में भी स्थिति गंभीर है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिज़ीज (NAFLD) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो करीब 38% वयस्कों और 35% बच्चों को प्रभावित कर रहा है। मोटापा, जंक फूड और गतिहीन जीवनशैली इसके बड़े कारण हैं। लेकिन सबसे खतरनाक वजह मानी जा रही है – अल्कोहल। डॉक्टरों का मानना है कि शराब की थोड़ी मात्रा भी लिवर के लिए घातक साबित हो सकती है।

शोधों में पाया गया है कि लगातार शराब पीना लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे सिरोसिस, फाइब्रोसिस और लिवर कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ अल्कोहल को लिवर रोगों का सबसे बड़ा खतरा मानते हैं।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी हाल ही में कहा था कि देश में हर तीसरा व्यक्ति फैटी लिवर डिजीज से ग्रसित हो सकता है। यही कारण है कि डॉक्टर सलाह देते हैं – शराब से दूरी और जीवनशैली में सुधार ही लिवर को स्वस्थ बनाए रखने का सबसे कारगर तरीका है।

संक्षेप में, अगर हमें आने वाले सालों में लिवर रोगों की महामारी से बचना है, तो अभी से सतर्क होना होगा। संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और नशे से परहेज ही इस खतरे को टालने का एकमात्र उपाय है।

(साभार)

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